MUSICAL & HANGING PILLARS IN HINDU TEMPLES HAS BAFFLED SCIENTISTS

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Kopeshwar Temple… World of stunning beauties

i got this amazing blog? on our rich heritage of Art of Architecture, Temple, Sculpture in Ancient India. Hoyasala Karnataka, presents a golden chapter of Arts in our History of India

Beauty of life lies hidden in even the most seemingly desolate of places. Kopeshwar Temple, relatively unknown to masses, some 60 Km from Kolhapur at the border of Maharashtra and Karnataka is one such beautiful world of stunning beauties and hidden gem of an architectural marvel blended with mesmerizing and awe inspiring extravagant masterpiece of sensuous carvings and sculptures.

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Water supply & related story

आज का पूरा दिन खराब था
प्रात: काल आंख खुली तो पहली बात याद आई आज पानी आने का दिन है। हम लोगो के घर हर दूसरे दिन यानी कि एक दिन छोड़ कर पानी आता है सीधीतौर कहे कि पानी रोजाना नही आता है। 7:00 बज चुके थे परंतु पानी नहीं आया था। यही चिंता का विषय था। थोड़े विलम्ब से पानीवाले ने आवाज़ लगाई। वह अपने हाथ से औजार पकड़कर जोर से पानी के पाइप पर आवाज करके बजाता है। दौड़ कर दो मंजिले से नीचे उतरकर पानी का वाल्व खोला फिर वापस चढ़कर घर आया। समस्या यह है कि एक बाथरूम(गुसलखाने व स्नानागार) में पानी ठीक से यानी कि जोर से आता है और दूसरे में बिल्कुल ना के बराबर। इसलिए इस गुसलखाने से पानी भरकर बाल्टी दूसरे गुसलखाने मे ले जाना पड़ता है। जब तक हमारी दो या तीन बाल्टी भरपाती हैं उतने ही समय में 1000 लीटर की टंकी भर जाती है और पानी टंकी से बाहर बहने लगता है। फिर दौड़कर नीचे जाकर पानी का वॉल्व बंद करना पड़ता है। कभी-कभी पानीवाला नीचे से चिल्लाने लगता है या पानी बंद कर देता है।
6 घर हैं हमारे ब्लॉक में पर खराब यह लगता है कि एक घर का पानी चाहे जितनी देर और चाहे जितनी बार गिरता है पर वह पानीवाला एक शब्द अपनी जुबान से नहीं निकालता।
वह घर इंजीनियर का है। इंजीनियराइन साहिबा के ठाठ हैं। जब चाहें जितना पानी फैलाएं या भरे कोई देखने सुनने वाला नहीं है।
इस सारे उपक्रम में शारीरिक श्रम तो होता ही है पर जो मानसिक तनाव होता है अपने विचारों द्वारा वह अकथनीय है और थकाने वाला है।
क्या यह स्वकल्पित है या स्वजनित है? मतलब कि हम कष्ट सहें और चुप रहें। और नियति मानकर भगवान को नमन करें।
सामने वाले घर में एक डॉक्टर रहने आए हैं। पहले दिन हमने पूछा कि पानी भर गया या नहीं? उसने सिर हिलाकर जवाब समझाया कि हां हो गया।
उस डॉक्टर को या उसके परिवार के किसी भी सदस्य को कभी भी सुबह पानी के लिए दौड़ भाग या किसी भी तरह की उहापोह की स्थिति में नहीं देखा। पता नहीं उनके यहां पानी कैसे भर जाता है? उनके ऊपर एक इंजीनियर रहते हैं अक्सर एक लड़का 6 या 6:30 बजे मोटरसाइकिल से आता है। यानि कि पानी वाले दिन उनका पानी भरने की ड्यूटी करता है।
डॉक्टर के बगल में और उनके नीचे बड़े साहब आईएस वगैरह रहते हैं। शायद वही इन दोनो बड़े साहबों का भी पानी भरता है? एक दो बार एक लड़के को देखा है होसकता है कि कोई और लड़का उनका पानी भरता हो? जब पानी नहीं आता है या पानी आने में देर होती है तब इस लड़के से ही हम पूछते हैं कि पानी आएगा कि नहीं? तब पता चलता है कि हां आएगा या पानी आने में देर होगी या फिर पाइप फट गया है देर से पानी आएगा या फिर टंकी में पानी कम है इसलिए देर से पानी आएगा।
एक दो नंबर मेरे पास भी हैं। एक फोन करा था तो उसने बोला मेरा तबादला हो गया है इसलिए कोई सूचना नहीं दे सकते।
एक जूनियर इंजीनियर को फोन किया तो उसने भी वही जवाब दिया पर फिर बोला कि मैं देखता हूं अभी।
मैंने उसको sms किया कि मुझे हमारे एरिया के जूनियर इंजीनियर का फोन नंबर दे दीजिए। उसका जवाब आज तक नहीं आया।
पानीवाला ऑफिस लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर है इसलिए आलस की वजह से वहां जाते नहीं है। और साल भर थोड़ी-बहुत इस तरह की असुविधा रहती है परंतु निपट जाता है। समय से पानी न आने की समस्या केवल हमको ही क्यों झेलनी पड़ती है? मुनिसिपल्टी नगरपालिका में किस से यह समस्या बताएं? वहां पर जाने पर एक भूलभुलिया का ऐहसास होता है। जैसे कि मानवों से भरे एक जंगल में आ गए हो। सभी मौका पडते ही टूटे पडेंगे।
हमारी नानी का घर ही बढिया था वहाँ एक कुआं था और वह केवल हमारे मकान का ही नही मोहल्ले मे कई लोगो के लिए पानी देथा था। दिन मे जितनी बार जब चाहो पानी निकाल लो।
कभी कभी कुए की सफाई भी कराई जाती थी। सभी लोग जानते थे कि कौन यह कार्य करता है। दौड़कर उसे खबर दी जाती थी और वह भी अपने आप समय या नियत दिन आजाता था। ज्यादा दौड़भाग नही करनी पड़ती थी।
चूँकि सरकारी और सामाजिक बदलाव आया। नगरपालिका आदि का विकास हुआ। कालांतर मे मोहल्ले मे कई लोगो ने घरो मे नल लगवा लिए इसलिए दूसरे लोगो का आना जाना बन्द हो गया। भाईचारा भी कम हो गया शायद? गांव ग्रामपंचायत मे भी ऐसा ही कुछ हुआ होगा?
किल्लत बड़े शहरों मे भी हुई। जल भण्डारण जलवितरण मे परेशानी होगई। कुछ शहरो में बहुत ज्यादा दिक्कत हो गयी। अलग अलग घर होने से ऐसी प्रणाली की आवश्यकता थी जो सुचारू रूप से जलवितरण और गन्दगी को निकाल सके। यहाँ पर बहुत शहर फेल हो गए। प्रधानमंत्री जी ने स्वच्छता अभियान के तहत एक नवीन ऊर्जा दी। जलवितरण जलप्रबन्धन दूषित जलनिस्तारण जलप्रदूषण आदि विषय एक छाते मे आये। यह देश के लिए अच्छा है । नागरिक के कर्तव्य और अपेक्षा उजागर हुए।

Penetration of #Internet into #minds of #youngones- #Teens?

Swayamkatha

download (8)Penetration of Internet is a topic which everyone likes to debate. Now days parents remain tensed over internet access in their homes. Earlier, 30 years back topic of discussion used to be the time spent of watching Television. Every household and all over the print media it was discussed as to how much time children need to spend on watching TV, since so called social media as we know today was not existing.download (12)

On doordarshan few psychologists were called and they told how much time children should spent on TV. Topic of debate remains same when computer revolution happened. Be in office or in home, people had TV, Computer also for entertainment, Then after few years a boom of television happened, flood of TV channels started coming, with ZEE and metro channel on DD and few more. Also thanx to the Ekta Kapoor with BALA ji telefilms pvt ltd, they…

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Apsara, Indian Sculpture 12th Century

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Dancing Celestial India (Uttar Pradesh). Early 12th century. Sandstone. H. 331/2 in. (85.1 cm) Promised Gift of Florence and Herbert Irving (L 1993.88.2) Metropolitan Museum of Art, NYC. The contours and richly ornamented surfaces of this celestial attendant to the gods exemplify a stylistic shift away from earlier Gupta-influenced forms. Here the linear play of surface decoration and dramatic contours replace the earlier emphasis on seamless volume and subtle balance. The sculptor has twisted the figure into an extraordinary pose that captures the essence of her dance and seems absolutely believable until one imagines actually trying to turn this way. The jewelry sways and emphasizes her movements, both in the way the necklaces and sashes follow the curves of her body and in the upward thrust of the spiked tips of her crown. The crisp carving of her adornments makes a pleasing contrast with the smooth and rounded surfaces of her flesh. Images of dancing semidivine attendants often appear on the outer walls of Hindu temples. They are placed near the figures of gods to honor the deity, just as actual female dancers honored the gods’ images within the temple.

this is what wiki listed?

But on the Met Museum one line is written?

“Imagine posing as a model for this dancing female figure. You’ll soon realize that this striking pose is anatomically impossible. Yet the sculptor has captured the essence of continuous, whirling motion.”  https://www.metmuseum.org/art/collection/search/38153

But in our Indian classical Dance or so to say in other Indian dances there are various pose, Mudras those may seem impossible for west minds? But In many pose/Mudras certain amount of training goes into, before perfecting it. Specially in BharatNatyam, Oddissi dances?

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Such are few common pose in or dance and Indian milieu? putting the red crimson red called Sindoor on forehead, that is symbol of Married women? But the way it is executed in dancing movement is something is captured the imagination of many artists. Even dancers also execute this movement with grace. Thus sculptors also put their expertise. Somtimes it is putting eye liner, or putting flower in hair plaits? or decorating head forehead etc. all such movements take shapes in various forms of arts.588c25ae9ce74cd0bc515f921e0d121a7ec453af8b975a1c12f355e1d7b9b0d67c2ca0db002594e468555a5735772632sit69.1_copy (1)C5T4l8mWEAA_aU8Cy5-AkGXcAAew5bCXiWoqgUQAALF8a

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Film Pakeezah, MeenaKumari ji
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Sunaina Hazari Lala, Kathak

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