तिलोत्तमा? Tillottama, beauty personified

अभी दरवाजे पर घण्टी बजी देखा तो हमारे पड़ोसी प्रोफ़ेसर थे। काफ़ी तमतमाये हुए थे। पूछा कि चाभी 🔑 चाबी दे कर गईं है। मतलब उनकी पत्नी। हमने तुरन्त कहा अन्दर आईए बैठिए। सारा क्रोध का बांध टूटने लगा। एक घंटे से हम इंतज़ार कर रहे हैं चाभी भी नहीं दी और फोन भी नहीं किया। तभी हमारी पड़ोसन आ गईं। हमारी जान वापस आ गई। यही लग रहा था कि पता नहीं आज क्या महाभारत होगी। पिछले साल भी यही हुआ था।

पड़ोसन आईं तो ऐसा लगा हमारे घर किसी देवी का पदार्पण आगमन हुआ। नवरात्रि का आगमन कल से हो रहा है। उनका स्वरूप ही ऐसा था। पता नहीं शब्दों मे विवरण कैसे करूँ।

विशाल मस्तक प्रस्तर पर विशाल लाल बिन्दी। शिवानी जी की कहानियों की कोई नायिका सी। उनसे अच्छा तो हम नहीं विवरण कर सकते।

माथे पर बड़ी सी बिन्दी देवी रूप का ही एहसास करा रही थी। चूकि वे माँ शारदा के आश्रम गयी थीं। बंगाली स्वेत साड़ी लाल बॉडर वाली पारंपरिक साड़ी। फूलों से सुसज्जित केश विन्यास, गजरा, जूडा, वेणी श्रिंगार से परिपूर्ण। सभी एकदम सटीक पूरे मापदंडों के सहित।

आते ही ढेर सारा सामान रखा। एक बड़ी माँ शारदा की मूर्ति हर प्रतियोगिता मे अव्वल आने के लिए। देवी महात्म्य का वाचन तथा संबधित गायन उन्होंने किया था। माँ सरस्वती की कृपा है उनपर। गला स्वर सभी उत्तम। रबीन्द्र सँगीत मे माहिर हैं।

घर आते ही यह हो गया। पती गुस्से से भरे हुए थे। तमतमाते घर चले गये हमने बहुत कहा कि चाय पीकर जाइये। नही सुना उन्होंने।

पत्नी बैठी हमारी पत्नी से बात कर रहीं थीं। हमे चिन्ता थी कि ए जल्दी से जाएं और पती को सम्भालें। चाय वगैरह मान मनुहार करें।

उनकी स्थिति को कैसे शब्दों मे बताएँ। उन्होंने खुद बोला छोड़ो हमारी किस्मत ही ऐसी मिली है।

सर्वगुण सम्पन्न होने पर भी इतना दुख भरा जीवन मिला उनको।

देखने पर कहीं से कोई एक भी अवगुण नहीं बता सकता। फिर भी इतना दुख? भगवान ने यहां गल्ती की है। ऎसा मेरा मानना है।

पिछले साल हुआ यह था कि प्रोफ़ेसर साहब घर पर थे और उनकी पत्नी थोड़ी देर से आश्रम लौटी थीं। काफी देर से दरवाजा खुलवाने की चेष्टा कर रहीं होंगी। हमे तुछ आहट लग रही थी। हम टीवी देख रहे थे कमरे का दरवाज़ा जीने मे ही खुलता है काफ़ी देर तक इंतजार के बाद हमने पत्नी से बोला कि देखो तो। दरवाज़ा खुलना था आँसुओं का बाँध टूट पड़ा। उन्होंने बताया कि बहुत देर से दरवाजा खुलवाने का प्रयास कर रहीं है। हमारी पत्नी ने दरवाज़ा खुलवाने का प्रयास किया। उन्होंने ने अंदर से जवाब दिया कि बहुत हुआ ए जाएँ कही भी जाएँ घर में नहीं आना है। पुलिस मे जाएँ कहीं भी जाएँ। अब संस्कार मर्यादाओं से पत्नी बंधी होने के कारण जोर से रुदन भी नहीं कर पा रहीं थी।

संस्कार की बेडियाँ भी अज़ीब होती हैं। भारतीय परिवारों मे महिलाएँ ही वहन करती हैं और इनकी वजह से ही भारतीय समाज भारतीय संस्कृति जीवित है।

हमारी पड़ोसन को संतान नहीं है। बाँझ शब्द एक नरक से बडा अभिशाप है भारतीय महिलाओं के लिए। शादी के बाद उनकी सास ने तो जैसे नाता एकदम तोड दिया। वे बहू को घर मे देखना ही नहीं चाहती। बेटे पर दबाव डालती होंगी दूसरी शादी के लिए। जायदाद भी बोलती होंगी कि बहू के नाम नहीं होनी चाहिए।

प्रोफ़ेसर साहब भी कई बार परेशान होते होंगे। ईलाज भी करवा चुके है। पर बच्चा न होने पर ज्यादातर दोष बहू पर ही मढा जाता है।

बहुत नही पर खास खानदान से सम्बंधित है दोनो लोग। उनके परिवार खानदान की दुर्गा पूजा परंपरा का काफी मान है।

उज्वल वर्ण, संगीत मे पारंगत, साजसज्जा वस्त्र परिधान मे उच्च कोटि के चुनाव से सभी लोग देवी स्वरूपा ही मानेंगे। पर निजी जीवन मे इतना दुख लेकर कैसे मन लगाती होंगी।

दुर्गा पूजा पर स्त्री शक्ति को नमन

Published by

Gaurang Katyayan misra

I am nobody on this vast globe. trying to search for my relevance for existence. Trying to read boundaries.. how to demolish them? want to walk on path of wisdom.. such as vivekananda, Ram, Krishna, Meera, kabir, Sankaracharya, rani chennama, ahilyabai holkar, Laxmi bai, umrao jaan, Rai praveen, Chanakya, SitaRam Raju, Shiva ji, lachit burfukan, Sankar Dev, list is endless

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s